STORYMIRROR

रहने खुशियां निर्धन है कोई खुश बेटी विविध व्याधियां चिंता है देती क्यू है भलाई देती है भलाई रहना सजग नहीं देती संस्कार दौलत धूप-छांव सी प्रकृति का रूप संवरता है कौन है बुरों से सदा बच के रहना धनवान परिवार सी चौंका अहंकार देती

Hindi देती है Poems